Norat Mal Nama
21-Mar-2026
'मिनी काशी' के रूप में निखर रही देवली, भक्ति के रंग में रंगा शहर
खाटू श्याम और अर्धनारीश्वर के बाद अब शहर में बनेगा सांवरिया सेठ का भव्य धाम
देवली ,आस्था और अध्यात्म के संगम से इन दिनों देवली शहर धर्मनगरी के रूप में परिवर्तित हो गया है। शहर के हर कोने में देवालयों का निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा महोत्सवों की धूम ने इसे एक नई पहचान दी है।
हाल ही में चैत्र नवरात्र पर एजेंसी एरिया स्थित नेवरबाग बालाजी मंदिर परिसर में श्रीदुर्गा माता एवं श्री वैष्णो माता का प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव संपन्न हुआ। दरअसल मुरारीलाल अग्रवाल, राजीव गोयल की ओर से आयोजित इस तीन दिवसीय महोत्सव की शुरुआत गत 17 मार्च को कलश यात्रा के साथ हुई। वहीं 19 मार्च दोपहर 12:15 बजे अभिजीत मुहूर्त में मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा के बाद महाआरती और प्रसादी का वितरण किया गया। देवली में हाल के वर्षों में धार्मिक आयोजनों और मंदिर निर्माण की जो लहर चली है, उसने शहर को 'भक्ति के केंद्र' में बदल दिया है। जयपुर रोड पर पिछले दिनों सेठ कल्पेश्वर बालाजी, गणेश जी महाराज, पशुपति महादेव और भेरुजी महाराज की प्राण प्रतिष्ठा ने क्षेत्र के धार्मिक वातावरण को और अधिक समृद्ध किया है। वहीं शहर के कुचलवाड़ा रोड स्थित विद्युत निगम कार्यालय के सामने श्री सांवरिया सेठ मंदिर का भूमि पूजन संपन्न हुआ है, जहां चित्तौड़गढ़ के प्रसिद्ध सांवरिया सेठ की तर्ज पर एक भव्य मंदिर का निर्माण किया जाएगा। फिलहाल सांवरिया सेठ विद्युत निगम कार्यालय परिसर स्थित मंदिर में विराजमान है। साथ ही सैकड़ो वर्ष प्राचीन कुचलवाड़ा स्थित बीजासन माता मंदिर में भी भव्य निर्माण कार्य जारी है, जो आगामी समय में क्षेत्र के प्रमुख आस्था केंद्रों में शुमार होगा। गौरतलब है कि देवली पिछले काफी समय से धर्म के रंग में रंगी नजर आ रही है। हाल ही में तेजाजी कॉलोनी में अर्धनारीश्वर भगवान शिव की प्राण प्रतिष्ठा हुई। जबकि कुछ सालों पूर्व जयपुर रोड स्थित पं दीनदयाल कृषि महाविद्यालय परिसर में लखदातर खाटू श्याम के भव्य मंदिरों का निर्माण हुआ है, जो श्याम भक्तों के लिए जीवन का आधार बन चुका है। फरवरी में जैन समाज के भव्य पंचकल्याणक महोत्सव और वर्तमान में अटल उद्यान परिसर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा ने श्रद्धालुओं को भक्ति से सराबोर कर रखा है। वही आए दिन सभी समाज के होने वाले धार्मिक कार्यक्रम भी शहर को धर्ममय बना रहे हैं। मां वैष्णो देवी मंदिर, श्रीचारभुजानाथ मंदिर, नेकचाल, गंगागोरिया, नेवर बाग समेत हनुमान मंदिर और गायत्री शक्तिपीठ जैसे प्रमुख आस्था केंद्रों के साथ-साथ सभी वर्गों द्वारा किए जा रहे ये आयोजन देवली की अटूट धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत को ऊंचाइयां दे रहे हैं।