Norat Mal Nama
11-Jun-2026
ताड़का वध और सिद्धाश्रम में ऋषियों की रक्षा का वर्णन किया
देवली ,देवली के अटल उद्यान में चल रहे 15 दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा ज्ञानयज्ञ में महामंडलेश्वर दिव्य मुरारी बापू ने अहिल्या उद्धार के प्रसंग पर प्रवचन दिए।
उन्होंने कहा कि जिस श्राप के माध्यम से साक्षात भगवान के दर्शन हो जाएं, वह श्राप नहीं बल्कि सबसे बड़ा आशीर्वाद है। बापू ने बताया कि अहिल्या ने अपने पति गौतम ऋषि के प्रति कोई शिकायत नहीं की, बल्कि पत्थर के रूप में बिताए वर्षों को भगवान राम के दर्शन के लिए मिला सौभाग्य माना। भगवान राम ने स्वयं उनके पास पहुंचकर उनके धैर्य की सराहना की और उद्धार किया। कथा के दौरान बापू ने राम-लक्ष्मण द्वारा ताड़का वध और सिद्धाश्रम में ऋषियों की रक्षा करने का सुंदर वर्णन किया। उन्होंने बताया कि विश्वामित्र मुनि से प्राप्त बला और अतिबला विद्या के कारण ही दोनों भाइयों को भूख, प्यास और थकान का अनुभव नहीं होता था। बापू ने श्रद्धालुओं को समझाते हुए कहा कि अविद्या ही मनुष्य को असुर बनाती है, जबकि प्रभु की भक्ति मनुष्य को हर कष्ट से मुक्त कर देती है। अहिल्या की तरह ही जो व्यक्ति अपने दुख प्रभु के चरणों में अर्पित कर देता है, उसे फिर संसार में किसी और के सामने आंसू नहीं बहाने पड़ते।