Norat Mal Nama
22-Jul-2026
देवली: शिक्षाविद, भामाशाह एवं जनसेवक डॉ. शिवजीलाल चौधरी (सरोली) ने अपना 41वाँ जन्मदिवस सेवा, संस्कार और समर्पण की भावना के साथ “सेवा संकल्प दिवस” के रूप में मनाया।
दिनभर आयोजित विभिन्न जनकल्याणकारी कार्यक्रमों में नर सेवा, नारायण सेवा, पर्यावरण संरक्षण एवं गौ सेवा का अनूठा संगम देखने को मिला। कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. चौधरी ने अपने जन्मदाता माता-पिता का आशीर्वाद प्राप्त कर किया। इसके पश्चात विभिन्न मंदिरों में देवदर्शन एवं पूजा-अर्चना कर समाज की सुख-समृद्धि की कामना की। अपनी कर्मस्थली पहुँचने पर हजारों विद्यार्थियों एवं स्टाफ सदस्यों की उपस्थिति में भव्य समारोह आयोजित हुआ, जहाँ जन्मदिन का केक काटा गया तथा स्टाफ साथियों ने 21 किलोग्राम की विशाल पुष्पमाला पहनाकर उनका आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया।
सेवा संकल्प दिवस के अंतर्गत डॉ. चौधरी ने विभिन्न सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थियों को ड्रेस वितरण किया तथा “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के तहत पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। पुलिस थाना परिसर सहित विभिन्न स्थानों पर भी पौधे लगाकर हरित वातावरण के प्रति लोगों को जागरूक किया। उन्होंने दूनी एवं बंथली गौशाला पहुँचकर गौमाताओं को हरा चारा एवं गुड़ खिलाया तथा उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके साथ ही दूनी अस्पताल में भर्ती रोगियों को फल वितरित किए तथा गाड़िया लुहार समाज के बालक-बालिकाओं को ड्रेस एवं फल वितरित कर मानवीय सेवा का प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया।
दिनभर विभिन्न सामाजिक, शैक्षणिक एवं धार्मिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों, युवा साथियों, वरिष्ठ नागरिकों, समाजबंधुओं, ग्रामवासियों, स्नेहीजनों तथा दूनी क्षेत्र के नागरिकों द्वारा डॉ. चौधरी का जगह-जगह स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएँ देने वालों का ताँता लगा रहा और सोशल मीडिया के माध्यम से भी हजारों बधाई संदेश प्राप्त हुए। विशेष बात यह रही कि रिमझिम बारिश के बीच भी सेवा कार्यों का उत्साह कम नहीं हुआ। प्रकृति की स्नेहिल फुहारों के बीच सम्पन्न हुए कार्यक्रम ने पूरे आयोजन को और अधिक यादगार बना दिया। जनसेवा, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण एवं गौसेवा के संकल्प के साथ मनाया गया यह जन्मदिवस क्षेत्र में चर्चा का विषय बना रहा। समाज के विभिन्न वर्गों ने इसे केवल जन्मदिन का आयोजन नहीं, बल्कि सेवा, संवेदना और सामाजिक उत्तरदायित्व का प्रेरणादायी महापर्व बताया। पूरे दिन चले सेवा कार्यों और जनसहभागिता के कारण यह जन्मोत्सव ऐतिहासिक, भव्य एवं अविस्मरणीय रूप में सम्पन्न हुआ।