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टोंक-पांव में पड़े छाले लेकिन नहीं टूटा किन्नर निशा बाई का हौंसला*,

Norat Mal Nama 22-Aug-2026
*टोंक-पांव में पड़े छाले लेकिन नहीं टूटा किन्नर निशा बाई का हौंसला*, देवली हरिद्वार से पवित्र गंगाजल की कावड़ लेकर 25जुलाई को हुयीं थीं रवाना,अब 750किलोमीटर का सफर तय कर 25अगस्त को देवली के अर्द्धनारिश्वर मंदिर में करेंगीं अभिषेक,निशा की गुरू पायल किन्नर ने पिछले वर्ष बनवाया था मंदिर,अर्द्धनारिश्वर की प्रतिमा की करायी थी प्राण प्रतिष्ठा,किन्नर अपने आप को मानते हैं अर्द्ध नारिश्वर का ही रूप. स्टोरी-जब मन में संकल्प व ईश्वर व गुरू के प्रति श्रद्धा हो तो पहाड़ जैसी मुश्किलें भी आसान हो जाती हैं.हम बात कर रहें एक ऐसे कावड़िये कि जो ना पुरूष है ना महिला बल्कि वह है अर्द्धनारिश्वर का रूप किन्नर जो अपने आराध्य भगवान शिव के अर्द्धनारिश्वर रूप के अभिषेक के लिये गंगा का पवित्र जल कावड़ नें लेकर लगभग 750किमी के सफर पर निकली हैं.जी हां यह हैं निशा बाई किन्नर जो टोंक जिले के देवली कस्बे से रवाना होकर 24जुलाई को हरिद्वार पहुंची थीं और वहां से दो कलशों वाली कावड़ में गंगा नदी के पवित्र जल को लेकर 25जुलाई को वहां से लगभग 750किलोमीटर लंबे सफर के लिये पैदल व नंगे पांव रवाना हुई थीं.बिना किसी सोशल मीडिया के प्रचार के अकेले ही वहां से देवली के लिये निकलीं निशा बाई किन्नर अब अपने लक्ष्य यानि की देवली कस्बे से महज कुछ किलोमीटर की दूरी पर हैं जहां वे 25अगस्त को अपनी किन्नर गुरू पायल बाई के द्वारा विगत वर्ष बनाये गये अर्द्धनारिश्वर मंदिर में दर्जनों किन्नरों के साथ मिलकर वहां अभिषेक करेगीं. हम खुद हैं अर्द्धनारिश्वर का रूप,इस रूप से नहीं कोई शिकायत,गुरू का आदेश सर्वोपरि- निशा बाई किन्नर ने बताया कि यूं तो वे टोंक जिले के ही उनियारा कस्बे की गद्दीपति हैं और देवली की पायल बाई किन्नर उनकि किन्नर गुरू हैं.निशा बाई ने बताया कि उनकि गुरू की इच्छा थी कि हरिद्वार से गंगा नदी का पवित्र जल कावड़ से उनके की जैसा कोई अर्द्धनारिश्वर रूप वाला किन्नर देवली लेकर आये व उनके बनाये अर्द्धनारिश्वर मंदिर में उससे अभिषेक करे.निशा बाई बताती हैं कि अपने गुरू की इच्छा पूरी करने के लिये उन्होने हरिद्वार से देवली तक पैदल व नंगे पांव कावड़ लाने का फैसला किया और अब उनकि यह 750किलोमीटर लंबी थका देने वाले यात्रा समाप्त होने को है.निशा बाई किन्नर ने कहा कि उन्हें इस जन्म में किन्नर का रूप मिलने से कोई मलाल या फिर अफसोस नहीं है और वे चाहती हैं कि अगली बार भी अगर उन्हें मनुष्य योनी में जन्म मिले तो वे फिर से ही किन्नर पैदा हों.निशा बाई किन्नर का कहना था कि उनकि यह भी प्रार्थना है कि सभी लोग खुश रहें जिससे की उनका पेट भी पलता रहे और वे उनकि बधाईयों में शामिल होती रहें. श्रद्धा से लोग छूते हैं पैर,मदद की भी करे हैं पेशकश- अकेले अपने दम पर हरिद्वार से देवली तक का सफर तय करने वाली निशा किन्नर बताती हैं कि वे जहां से भी गुज़री वहां उन्हें अन्य कावड़ियों व लोगों का काफी स्नेह व सम्मान मिला है.यहां तक कि जब शुरूआत में उनके पांवों में छाले व पड़ गये थे व दर्द काफी था उस समय उनकि सेवा करने में लोग पीछे नहीं रहे.निशा ने बताया कि पूरे रास्ते लोगों ने उन्हें बहुत सम्मान दिया.ख़ासतौर से राजस्थान के लोगों ने तो उनका हर जगह जमकर हौंसला बढ़ाया.निशा बाई ने मुस्लिम महिलाओं द्वारा बुर्का पहन कावड़ उठाये जाने को लेकर मचे बवाल पर कहा कि श्रद्धा कपड़ों व धर्म में नहीं बल्कि जिस भावना से यह काम किया जाता है उसमें होती हैं.लिहाजा ऐसे मामलों को ज्यादा तूल नहीं दिया जाना चाहिये.

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