Norat Mal Nama
26-Oct-2026
देवली । शान्ति सिन्धु व्यक्तित्व परिचर्चा के अन्तिम दिन का उद्बोधन मुनि वैराग्य सागर महाराज ने कहा कि आचार्य विद्या सागर महाराज ने वर्तमान में युवा को दीक्षा देकर जिन शासन को चिर समय के लिए जीवंत बना दिया। वर्तमान में बाल ब्रह्मचारी मुनि या आर्यिका है, वे कही न कही आचार्य विद्यासागर जी महाराज से प्रभावित रहे है। उनके द्वारा दिए गया एक छोटा नियम भी जीवन का उत्थान का सूत्रपात कर देता है।
मुनि सुप्रभसागर महाराज ने कहा कि आचार्य शान्तिसागर महाराज के लगाया वृक्ष आज बहुत फल फूल रहा है उसमें आचार्य विद्यासागर महाराज का अस्मरणीय योगदान दिया। आचार्य विद्यासागर महाराज का वात्सल्य सभी साधकों के प्रति रहता था। उन्होंने जैन धर्म के मात्र नहीं थे वे जन-जन के श्रद्धास्पद संत थे। उन्होंने जन कल्याण के कार्यों के रूप में हथकरघा, शिक्षा के क्षेत्र में प्रतिभा स्थली, चिकित्सा के क्षेत्र में भाग्योदय, पूर्णायु आदि प्रकल्प तैयार किए। आचार्य शान्ति सागर महाराज की पट्टपरम्परा के वर्तमान आचार्य वर्धमान सागर जी का जीवन कठिनाइयों के बीच से निकल कर श्रमण पद की साधना कर रहे है। उनके सानिध्य में वे वात्सल्य के सागर है, इसका प्रमाण है कि उनके सान्निध्य में श्रवण बेलगोला के तीन महामस्तकाभिषेक सम्पन्न हुए।
[ ] आज की परिचर्चा में डॉ. विमल जैन, रंजना जैन वर्षा जैन एवं ब्र. आशु बहन ने भी विचार रहे। गुरु पूजन का अवसर पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मन्दिर को प्राप्त हुआ। इससे पूर्व संध्या पर आचार्य शान्तिसागर महाराज जी के जीवन पर लघु नाटिका का आयोजन हुआ जिसमें आचार्य शान्तिसागर महाराज जी गृह अवस्था, मुनि दीक्षा, आचार्य दीक्षा, सहित संलेखना का दर्शायी गई।